दर्द उठा जा रहा है सीने में आंखों में आंसू आना बाकी है
रास आएगी न अबकी मुझको बहार मगर सावन आना बाकी है
आकाश में खिली चांदनी भी तुम्हारी सुंदरता से कम है
मैं गीत हूं तेरे रसवंती होठों का तू भी तो इन गीतों की सरगम है
Tuesday, November 20, 2012
नमस्कार।
शेर-ओ-शायरी मेरा पुराना शौक है, पढ़ता हूं, सुनता हूं और कुछ लिखता भी हूं, कुछ लोगों को पसंद आती हैं तो कुछ को नहीं भी, लेकिन स्वान्त: सुखाय वाली बात तो है ही, आप ही बताइएगा, मैं शायर हूं या नहीं। आज सिर्फ इतना ही -
तुमसे मिलने के बाद अहसास हुआ मुझे
बर्फीले मौसम की आग छू कर गई है