Tuesday, November 20, 2012

नमस्‍कार।

शेर-ओ-शायरी मेरा पुराना शौक है, पढ़ता हूं, सुनता हूं और कुछ लिखता भी हूं, कुछ लोगों को पसंद आती हैं तो कुछ को नहीं भी, लेकिन स्‍वान्‍त: सुखाय वाली बात तो है ही, आप ही बताइएगा, मैं शायर हूं या नहीं।  आज सिर्फ इतना ही -


तुमसे मिलने के बाद अहसास हुआ मुझे
बर्फीले मौसम की आग छू कर गई है

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