Friday, December 14, 2012

तेरे ओहदे का अहसास मुझे भी है
मेरी मुहब्‍बत की तल्‍खी तो देख
भंवरे तेरे इर्द-गिर्द हजारों हैं
मेरी प्‍यास की तलब तो देख
तेरे न होने का आलम यह है कि नींद आती नहीं
तेरे होने पर नींद से इश्‍क करने की फुरसत कहां होगी
अपनी तो आदत है हर किसी को अपना मान लेते हैं
वो दूसरे होंगे जो दिल लगाने से पहले इम्तिहान लेते हैं
सुना था दिल बड़ा नाजुक सा होता है
लगाया तो जाना भावुक भी होता है

तुम्‍हारी हस्‍ती में डूब जाने को बेताब हूं मैं
कुछ देर के लिए ही सही, तेरे साथ तो हूं मैं 


हर कहीं धूप-छांव आ सकती है
हर कहीं फूल खिल सकता है
तुझे ढूंढ़ने मैं बाहर क्‍यों जाऊं
हर कहीं भगवान मिल सकता है
निखार आ रहा है मौसम का तुम्‍हारे चेहरे पर
मैं छोड़ आया हूं नींद अपने बिस्‍तर पर
लबों को सी लेने से हाल-ए-दिल बयां नहीं होता
होता तो जमाने में हमसा कोई गुस्‍ताख नहीं होता
छू लिया था उस दिन बेख्‍याली में उसके मरमरी हाथों को
अब अंगुलियों को किसी छुअन की आरजू रही नहीं
अपने ही ख्‍यालों की बे-कद्री करता हूं
मैं सिर्फ तुम्‍हारी रुह से प्‍यार करता हूं
वो आरजू ही रही होगी मेरी शायद
वर्ना तुमसे मुलाकात हो ही जाती
ऐसा तो नहीं कि मैं हमेशा खामोश रहूं
मेरे होठों के पीछे एक जुबां भी रहती है,
डरता हूं कि तू गलत न समझ ले, 
मेरी धड़कन में तेरे जिस्म से रवानी रहती है

Wednesday, December 12, 2012

उस दिन तो बस तेरा ही इंतजार था
तेरी गली के मोड़ पर अब रुकता नहीं मैं
आने वाले कल का यूं तो इंतजार नहीं है
मगर तेरे आने की उम्‍मीद अभी बाकी है
नहीं मालूम मुझे तेरी आंखों की गहराई बस,
गहरे, और गहरे उतरने का आनंद ही कुछ और है
तेरे ख्‍यालों में गुम होना महज इतफ़ाक तो नहीं
दिल के साथ-साथ आंख भी नम होने लगी है
मुकम्‍मल प्‍यार नहीं है तेरा भगवान से, ऐ इंसान
जो दिलों में बसता है उसे मूर्ति बनाकर रख दिया
पूजा के लिए भी सुविधाएं जुटाई, भोग लगाया
चढ़ावे के नाम पर श्रद्धा को धंधा बनाकर रख दिया

Wednesday, November 21, 2012

दर्द उठा जा रहा है सीने में आंखों में आंसू आना बाकी है
रास आएगी न अबकी मुझको बहार मगर सावन आना बाकी है

आकाश में खिली चांदनी भी तुम्‍हारी सुंदरता से कम है
मैं गीत हूं तेरे रसवंती होठों का तू भी तो इन गीतों की सरगम है

Tuesday, November 20, 2012

नमस्‍कार।

शेर-ओ-शायरी मेरा पुराना शौक है, पढ़ता हूं, सुनता हूं और कुछ लिखता भी हूं, कुछ लोगों को पसंद आती हैं तो कुछ को नहीं भी, लेकिन स्‍वान्‍त: सुखाय वाली बात तो है ही, आप ही बताइएगा, मैं शायर हूं या नहीं।  आज सिर्फ इतना ही -


तुमसे मिलने के बाद अहसास हुआ मुझे
बर्फीले मौसम की आग छू कर गई है