Friday, December 14, 2012

तेरे ओहदे का अहसास मुझे भी है
मेरी मुहब्‍बत की तल्‍खी तो देख
भंवरे तेरे इर्द-गिर्द हजारों हैं
मेरी प्‍यास की तलब तो देख
तेरे न होने का आलम यह है कि नींद आती नहीं
तेरे होने पर नींद से इश्‍क करने की फुरसत कहां होगी
अपनी तो आदत है हर किसी को अपना मान लेते हैं
वो दूसरे होंगे जो दिल लगाने से पहले इम्तिहान लेते हैं
सुना था दिल बड़ा नाजुक सा होता है
लगाया तो जाना भावुक भी होता है

तुम्‍हारी हस्‍ती में डूब जाने को बेताब हूं मैं
कुछ देर के लिए ही सही, तेरे साथ तो हूं मैं 


हर कहीं धूप-छांव आ सकती है
हर कहीं फूल खिल सकता है
तुझे ढूंढ़ने मैं बाहर क्‍यों जाऊं
हर कहीं भगवान मिल सकता है
निखार आ रहा है मौसम का तुम्‍हारे चेहरे पर
मैं छोड़ आया हूं नींद अपने बिस्‍तर पर