तेरे ओहदे का अहसास मुझे भी है मेरी मुहब्बत की तल्खी तो देख भंवरे तेरे इर्द-गिर्द हजारों हैं मेरी प्यास की तलब तो देख
तेरे न होने का आलम यह है कि नींद आती नहीं तेरे होने पर नींद से इश्क करने की फुरसत कहां होगी
अपनी तो आदत है हर किसी को अपना मान लेते हैं वो दूसरे होंगे जो दिल लगाने से पहले इम्तिहान लेते हैं
सुना था दिल बड़ा नाजुक सा होता है लगाया तो जाना भावुक भी होता है
तुम्हारी हस्ती में डूब जाने को बेताब हूं मैं
कुछ देर के लिए ही सही, तेरे साथ तो हूं मैं
हर कहीं धूप-छांव आ सकती है हर कहीं फूल खिल सकता है तुझे ढूंढ़ने मैं बाहर क्यों जाऊं हर कहीं भगवान मिल सकता है
निखार आ रहा है मौसम का तुम्हारे चेहरे पर मैं छोड़ आया हूं नींद अपने बिस्तर पर
लबों को सी लेने से हाल-ए-दिल बयां नहीं होता होता तो जमाने में हमसा कोई गुस्ताख नहीं होता
छू लिया था उस दिन बेख्याली में उसके मरमरी हाथों को अब अंगुलियों को किसी छुअन की आरजू रही नहीं
अपने ही ख्यालों की बे-कद्री करता हूं मैं सिर्फ तुम्हारी रुह से प्यार करता हूं
वो आरजू ही रही होगी मेरी शायद वर्ना तुमसे मुलाकात हो ही जाती
ऐसा तो नहीं कि मैं हमेशा खामोश रहूं मेरे होठों के पीछे एक जुबां भी रहती है, डरता हूं कि तू गलत न समझ ले, मेरी धड़कन में तेरे जिस्म से रवानी रहती है
Wednesday, December 12, 2012
उस दिन तो बस तेरा ही इंतजार था तेरी गली के मोड़ पर अब रुकता नहीं मैं
आने वाले कल का यूं तो इंतजार नहीं है मगर तेरे आने की उम्मीद अभी बाकी है
नहीं मालूम मुझे तेरी आंखों की गहराई बस, गहरे, और गहरे उतरने का आनंद ही कुछ और है
तेरे ख्यालों में गुम होना महज इतफ़ाक तो नहीं दिल के साथ-साथ आंख भी नम होने लगी है
मुकम्मल प्यार नहीं है तेरा भगवान से, ऐ इंसान जो दिलों में बसता है उसे मूर्ति बनाकर रख दिया पूजा के लिए भी सुविधाएं जुटाई, भोग लगाया चढ़ावे के नाम पर श्रद्धा को धंधा बनाकर रख दिया