मुकम्मल प्यार नहीं है तेरा भगवान से, ऐ इंसान
जो दिलों में बसता है उसे मूर्ति बनाकर रख दिया
पूजा के लिए भी सुविधाएं जुटाई, भोग लगाया
चढ़ावे के नाम पर श्रद्धा को धंधा बनाकर रख दिया
जो दिलों में बसता है उसे मूर्ति बनाकर रख दिया
पूजा के लिए भी सुविधाएं जुटाई, भोग लगाया
चढ़ावे के नाम पर श्रद्धा को धंधा बनाकर रख दिया
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